Wednesday, 16 November 2016

सुर 


संगीत के प्रमुख  सात शुद्ध सुर ( सा रे ग म प ध नि ) होते है और पाँच विकृत सुर ( रे ग ध नि और म तीव्र ) होते है।  सुर की परिभाषा शास्त्र में "निश्चित  ऊचाई का सुर जो स्थिर हो और मन को आनद जैसा महसूस हो उसे सुर कहा जाये " यह एक अनुभुतिकीही बात है।  इसका वर्णन करना सम्भव नहीं हो सकता।
                                  सुर को रियाज द्वारा हासिल करना चाहिए।  आवाज में सरलता लेन के  लिए सुरोका  नित्य  रियाज बहोत ही जरुरी है।  यह बात अपनी गुरु के सानिध्य में हो तो अपने रियाज की शुद्धता जाची परखी आगे बढ़ा सकेंगे।  

Tuesday, 15 November 2016

भारतीय शास्त्रीय संगीत 

भारतीय शास्त्रीय संगीत के कई आयाम अभीतक सब ने सुने होंगे, पढ़े होंगे, लिखे होंगे लेकिन प्रत्यक्ष गायन के समय यह सब बाते अलग ही अनुभूति दे जाते है।  माना  जाता है के भारतीय शास्त्रीय संगीत इस धरातल की अनोखी देंन है और इसे बहोत से  संगीत के अभ्यासकोने अपनी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते निभाते आज यह रूप में संगीत गाते और सुनते है। 
                    रियाज करनेसे गले की शुद्धता के साथ गाना बेहतर से और बेहतर होता है यह हम सब जानते ही है। रोज के रियाज से ही हर प्रकार के गीत को आसानी से गाया बजाया जा सकता है। यह सब बाते मैं  आप सब से शेयर करना चाहता हु।  शास्त्रीय संगीत के कुछ बातो को आपतक इस ब्लॉग के माध्यम से पहुचाना चाहता  हु।