सुर
संगीत के प्रमुख सात शुद्ध सुर ( सा रे ग म प ध नि ) होते है और पाँच विकृत सुर ( रे ग ध नि और म तीव्र ) होते है। सुर की परिभाषा शास्त्र में "निश्चित ऊचाई का सुर जो स्थिर हो और मन को आनद जैसा महसूस हो उसे सुर कहा जाये " यह एक अनुभुतिकीही बात है। इसका वर्णन करना सम्भव नहीं हो सकता।
सुर को रियाज द्वारा हासिल करना चाहिए। आवाज में सरलता लेन के लिए सुरोका नित्य रियाज बहोत ही जरुरी है। यह बात अपनी गुरु के सानिध्य में हो तो अपने रियाज की शुद्धता जाची परखी आगे बढ़ा सकेंगे।